Thursday, 22 October, 2020

Chitralekha Hindi Book Free Download / चित्रलेखा हिंदी में डाउनलोड


Chitralekha Hindi Book Free मित्रों यह चित्रलेखा बुक्स है।  आप यहां से चित्रलेखा बुक्स फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं। चित्रलेखा बुक आप यहां से Chitralekha Hindi ( लिंक से ) डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

भगवती चरण वर्मा द्वारा चित्र लेखा नामक उपन्यास 1934में लिखा गया था। इस उपन्यास ने बहुत सारे कीर्तिमान स्थापित किये थे। चित्रलेखा उपन्यास से भगवती चरण वर्मा को अपार ख्याति अर्जित हुई थी। इस उपन्यास की गणना श्रेष्ठतम उपन्यासों में होती है।

 

 

 

 

 

इस उपन्यास के ऊपर 1940 में एक पिक्चर का निर्माण हुआ था। उसका नाम भी चित्रलेखा था। इसकी लोकप्रियता ने समय की सारी सीमाओं को पार कर लिया था।

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए —- एक चौधरी अपनी बैलगाड़ी पर लकड़ी लादकर बेचने के लिए बजा जा रहा था। रास्ते में उसे एक ठग मिला। उसने चौधरी से गाड़ी पर लदी लकड़ियों के दाम पूछे।

 

 

 

 

चौधरी ने उसे 5 रूपये बताया। ठग ने कहा, “चलकर लकड़ियां हमारे दरवाजे पर गिरा दो।” चौधरी ने लकड़ियां ठग के दरवाजे पर गिरा दिया तो ठग ने बैल के साथ ही बैलगाड़ी भी छोड़ने को कहा।

 

 

 

 

 

 

इसपर चौधरी ने कहा, “सिर्फ लकड़ी का ही दाम हुआ था। ठग ने कहा, “मैंने एक गाड़ी लकड़ी का दाम पूछा था और बैल तो गाड़ी के साथ ही थे। इसलिए तुम सब कुछ यहां पर छोडो और अपने 5 रूपये लेकर चले जाओ।” चौधरी 5 रूपये लेकर घर आ गया।

 

 

 

 

 

चौधरी के चार लड़के थे। सबको बात मालूम हुई लेकिन छोटे लड़के ने ठग को सबक सीखने का निश्चय किया। एक दिन चौधरी का लड़का एक बैलगाड़ी पर लकड़ी लादकर ठग के दरवाजे पर पंहुचा। ठग ने उससे लकड़ी का दाम पूछा।

 

 

 

 

 

लड़के ने दो मुट्ठी सोने का सिक्का बताया। ठग अपने दोनों हाथ में मुट्ठियां बांधकर सोने का सिक्का दिया और गाड़ी बैल के साथ ही लकड़ियां रखने को कहा।

 

 

 

 

 

लड़के को सारी बात पहले ही पता थी। उसने ठग की मुट्ठियों को मरोड़ना चालू किया और बोला, “पैसा मुट्ठियों में रखा हुआ है। इसलिए यह दोनों हाथ की मुट्ठियां हमारी हुई, मैं इन्हे तोडूंगा। ”

 

 

 

 

 

अब ठग की हालत ख़राब थी। उसने अपनी पगड़ी को उसके पैरों पर रखकर माफ़ी मांगी। फिर पहले वाले बैल और गाड़ी लकड़ी के साथ वापस कर दिया। चौधरी का लड़का दो बैलगाड़ी लेकर घर आ गया।

 

 

 

 

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