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Download All Puran PDF Hindi Free / सभी पुराण यहां से डाउनलोड करें।

Download All Puran PDF Hindi Free मित्रों इस पोस्ट में सनातन  (हिन्दू धर्म ) के All Ved Puran के बारे में बताया गया है।  आप नीचे की लिंक से 18 Puranas in Hindi PDF फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

1- ब्रह्म पुराण Brahm Puran PDF

 

2- भागवत पुराण Bhagwat Puran PDF

 

3- ब्रह्माण्ड पुराण भाग १ ब्राह्माण पुराण भाग २

 

4- गरुड़ पुराण Garud Puran PDF Free Download 

 

5- लिंग पुराण Ling Puran PDF

 

6- कूर्म पुराण kurma Puran PDf Free

 

7- वाराह पुराण

 

8- स्कन्द पुराण Skand Puran PDF Free 

 

9- वामन पुराण

 

10- विष्णु पुराण Vishnu Puran Hindi PDF Free

 

11- ब्रह्म वैवर्त पुराण

 

12- अग्नि पुराण Agni Puran PDF Hindi

 

13- { PDF } Bhavishya Puran PDF Hindi Download / भविष्य पुराण हिंदी में

 

14- Harivansh Puran PDF Hindi Free / हरिवंश पुराण हिंदी फ्री डाउनलोड करें।

 

15- Shiv Mahapuran in Hindi PDF / शिव महापुराण हिंदी में डाउनलोड करें।

 

16- Devi Bhagwat Puran in Hindi PDF Free Download / देवी भगवत पुराण

 

17- Kalika Puran Hindi PDF Download / कालिका पुराण डाउनलोड करें।

 

18- मार्कण्डेय पुराण

 

19- नारद पुराण Narad Puran PDF Free

 

20- मत्स्य पुराण भाग १ मत्स्य पुराण भाग २

 

21- पद्म पुराण Padma Puran PDF Free

 

22- कल्कि पुराण Kalki Puran PDF Hindi Free

 

23- वायु पुराण भाग १ वायु पुराण भाग २

 

24- Narasimha-Puran Pdf Free

 

 

 

 

Garud Puran in Hindi PDF – मित्रों आप यहां Garun Puran in Hindi PDF के बारे में बताया जा रहा है। मृत्यु जीवन का सत्य है क्या वाकई मृत्यु के समय मृत्यु को कोई दिव्य दृष्टि मिलती है। गरुड़ पुराण में गरुड़ विष्णु के आत्मा के विषय में प्रश्न पूछते है। लेकिन एक सत्य मृत्यु के बाद शुरू होता है। जिसे कम लोग जानते है।

 

 

 

 

 

आखिर मृत्यु के कितने दिनों बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है। मृत्यु से पहले मनुष्य की आवाज चली जाती है। अंतिम समय में मनुष्य को दिव्य दृष्टि मिलती है। उसकी इन्द्रियां शिथिल हो जाती है और वह संसार को एक समान देखने लगता है।

 

 

 

 

 

इसलिए मनुष्य को अच्छे कर्म करने चाहिए जिससे मनुष्य को पीड़ा न हो और आत्मा आराम से शरीर का त्याग कर सके। इसलिए आदमी को अपने जीवित अवस्था में ही नेक कर्म करना चाहिए।

 

 

 

 

1. बुरे कर्म से बचाव- बुरे कर्म कुछ देर के लिए ख़ुशी दे सकते है लेकिन उसी मनुष्य को मुसबतें झेलनी पड़ती है। जिसने बुरा कर्म किया है।

 

 

 

2. मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्मों में प्रवृत्त होना चाहिए, जिससे उसका अंत समय कष्ट रहित हो जाए।

 

 

 

3. जो लोग मिथ्या बातें कहते है या झूठी कसमें खाते है। वे मौत के समय अचेतावस्था में पहुंच जाते है। उनकी आवाज साफ नहीं निकलती है।

 

 

 

 

2- Markandeya Puran Hindi PDF – मार्कण्डेय पुराण की तीन मुख्य बातों को मनुष्य को अपने जीवन में अवश्य ही पालन करना चाहिए, जिससे उसका जीवन सफल हो सके।

 

 

 

 

ऋषियों और मुनियों के जीवन में अनेक कठिनाई आती है। लेकिन वह बिना रुके और विचलित हुए अपने मार्ग पर आगे बढ़ते ही जाते है। जिससे उन्हें महान माना जाता है।

 

 

 

 

उनके जीवन से मनुष्य को अवश्य ही प्रेरणा लेनी चाहिए। मार्कण्डेय ऋषि की आयु अल्प थी, यानी उनको 16 वर्ष का जीवन प्राप्त था। लेकिन उन्होंने अपनी तपस्या से ही “चिरंजीव” होने का लक्ष्य हासिल कर लिया और महान ऋषि में शामिल हो गए।

 

 

 

 

 

 

मार्कण्डेय ऋषि भगवान शंकर के परम भक्त थे और भगवान विष्णु के भक्त भी थे। उनका उल्लेख कई पुराणों में प्राप्त होता है। महर्षि ने खुद एक पुराण की रचना की थी। जिसका नाम “मार्कण्डेय पुराण” था। उन्होंने उस पुराण में लोकहित के लिए कई नीतियों का वर्णन किया है।

 

 

 

 

3- Kalki Puran PDF Free Download कल्कि पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी का संदेश पाकर कल्कि भगवान मनुष्य रूप में प्रकट होगे। विष्णु महापुराण मे कल्कि अवतार का विस्तृत रूप से वर्णन हुआ है। श्रीमद्भागवत महापुराण में बारहवें स्कंद के द्वितीय अध्याय में लिखा गया है।

 

 

 

 

 

शम्भल ग्राम में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के पुत्र के रूप में भगवान कल्कि का जन्म हुआ।  भगवान कल्कि के शिशु रूप दर्शन के लिए परशुराम, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, वेदव्यास, द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा भिक्षुक रूप में मौजद रहेंगे।

 

 

 

 

 

भगवान कल्कि का जन्म साधु स्वभाव वाले गार्ग्य भर्ग्य और विशाल आदि कुल में कल्कि का जन्म होगा। विष्णु पुराण के अनुसार ही उनके तीन भाई और होगे।उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके पिता द्वारा होगी। आगे की शिक्षा के लिए भगवान परशुराम उन्हें अपने आश्रम महेंद्र गिरि पर्वत ले जाएंगे और वहां अपना परिचय देंगे।

 

 

 

 

 

अपना परिचय वह वेद वेदांग और धनुर्विद्या विराशद के रूप में बताएंगे। कल्कि भगवान का यह अवतार निष्कलंक अवतार निष्कलंक भगवान के नाम से जाना जाएगा। उनका वाहन देवदत्त नाम का एक अश्व होगा और वह अपनी शक्ति से दुष्टों का संहार करेगे।

 

 

 

 

 

 

उसके पश्चात ही सतयुग का आरंभ होगा। जन्म के समय उनकी चार भुजाए होगी। उनके माता पिता को भ्रम प्रतीत होगा। जिस दिन से भगवान कल्कि का जन्म शम्भल ग्राम में होगा उस दिन से वहां का सब कुछ सुखमय हो जायेगा।

 

 

 

 

Harivansh Puran —- इस पुराण में गौ दान की महत्ता पर बल दिया गया है। हरिवंश पुराण श्रवण करने के पूर्व ही गौ दान आवश्यक बताया गया है।

 

 

 

 

गौ दान के बिना यह पुराण फल विहीन हो उठता है। इसका महत्व कम हो जाता है। कहा जाता है कि जो कुछ भारत में है वही महाभरत में दर्शाया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

इसमें देवताओं और कालनेमि का युद्ध वर्णित है। इसमें सर्वप्रथम “वैवस्तमनु और यम” के विवरण प्राप्त होते है। भगवान विष्णु के आश्वासन के उपरांत अवतारों के विषय में निश्चित किया पुनः देवता अपने स्थान गमन कर गए, फिर नारद और कंश का संवाद हुआ था।

 

 

 

 

 

 

इस पुराण में विष्णु का कृष्ण रूप में अवतरित होना उसके बाद कृष्ण की ब्रज की यात्रा व कृष्ण की बाल लीला वर्णित की गई है। इसमें धेनकासुर वध और कंश का वध उग्रसेन को राज्य देने की कथा का उल्लेख है। इसमें कृष्ण के द्वारा “शंकर की उपासना” का भी उल्लेख है।

 

 

 

 

 

यह कथा श्रवण करते समय समर्पण भाव का होना आवश्यक है। हमारे पुराण हमें आधार देते है। इसमें श्रवण से निरंतर मनुष्य के भीतर चलने वाले द्वन्द का समापन होता है।

 

 

 

 

 

हमारे पुराणों में कही हुई बातें और शैली को यथावत रूप से स्वीकार किया गया है। लेकिन “तत्व दर्शी” परमात्मा को समझने वाले शब्दों का प्रयोग अक्षरशः उसी प्रकार किया गया है जिससे पाठक आसानी से आत्मसात कर सके।

 

 

 

 

 

कलयुग ( वर्तमान ) समय की रूप रेखा पुराणों में पहले से ही विद्यमान है जो ठीक वैसे ही इस समय ( वर्तमान ) में परिलक्षित होती है। पुराणों में हर तरह का वर्णन है और पुराण का वर्णन करने वाले रचनाकार ने अपनी कृति में देवताओं की “कुप्रवृत्तियों” पर भी विवेचना किया है।

 

 

 

 

 

 

लेकिन उसका मूल उद्देश्य सत्य की प्रतिष्ठा और सद्भावना का विकास ही है। “हरिवश पुराण” हिन्दू धर्म का अनमोल ग्रंथ है। अगर मानव इस पुराण का शतांश भी अपने जीवन में उतार ले तो उसका जीवन “संसारिक” पथ पर आनंद और सुगमता के साथ व्यतीत हो सकता है।

 

 

 

 

 

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