Thursday, 22 October, 2020

25 + Hindi Novels PDF Free Download / हिंदी उपन्यास फ्री डाउनलोड


Hindi Novels PDF Free

Hindi Novels PDF Free मित्रों इस पोस्ट में Novel in Hindi के बारे में दिया गया है।  आप नीचे की लिंक से कई सारे Hindi Novel PDF डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

Hindi Novels PDF Free Download हिंदी उपन्यास फ्री डाउनलोड

 

 

 

1- भूख हिंदी उपन्यास डाउनलोड करें।

 

2- Tapasya Hindi Novel Free Download

 

3- गर्म राख हिंदी उपन्यास फ्री डाउनलोड करें। ( famous Hindi Novels ) 

 

4- Gandhmandal-Ki Rani Writer Dhirendra Varma Free Novel Download

 

5- Apsaraa Written By Shree Dularelal Bhargav Free Novel Download

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए ( Hindi Novel PDF Free Download ) —- एक गांव में एक आदमी रहता था। वह दुर्गा देवी की पूजा किया करता था। एक बार वह जंगल में कई वर्षों तक तपस्या करता रहा। दुर्गा देवी प्रसन्न हुई और वर मांगने के लिए कहा। वह आदमी सोचकर बोला, “हमें संजीवनी की डाली दे दो।”

 

 

 

 

देवी ने उसे संजीवनी की पत्तियां देते हुए कहा, “तुम जिस मरे हुए शव के ऊपर इन पत्तियों का रस निचोड़कर डाल दोगे तो वह जिन्दा हो जायेगा। यह पत्तियां कभी भी ना तो सूखेगी ना ही कम होगी लेकिन सोच समझ कर ही प्रयोग करना।”

 

 

 

 

 

वह मुर्ख आदमी सोचा कहीं देवी ने हमें धोखा तो नहीं दिया है। मैं इसकी जांच कर लेता हूँ।  सामने ही एक मारा हुआ शेर पड़ा था। मुर्ख आदमी ने उसके ऊपर संजीवनी को निचोड़कर उसका रस गिरा दिया। अब शेर जिन्दा हो गया। पहले से ताकतवर भी हो गया। उसने अगल-बगल नजर दौड़ाई तो मुर्ख आदमी वहीं खड़ा था। शेर ने उसे अपना निवाला बना लिया।

 

 

 

 

2- Hindi Novel PDF Download – कंचन पुर गांव में कैलाश नाम का एक बहुत ही संपन्न किसान रहता था। उसकी पत्नी का नाम सगुन था। उसके दो बच्चे थे, एक लड़का और एक लड़की। लड़की बड़ी थी लेकिन बहुत ही कुशाग्र बुद्धि की थी और लड़का भी अपनी बहन से कही भी कमतर नहीं था।

 

 

 

 

लडके का नाम रवि और लड़की का नाम सुधा था। कैलाश का बहुत ही खुशहाल परिवार था। अक्सर ही देखा गया है कि किसी भी खुशहाल परिवार के उपर किसी न किसी की बुरी नजर लग ही जाया करती है, सो कैलाश के परिवार पर भी किसी की बुरी नजर लग गई।

 

 

 

 

सगुन जो कैलाश की धर्म पत्नी थी, उसकी तबीयत खराब हो गई।  बहुत दवा करवाई कैलाश ने,लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ और पत्नी की दवा में कैलाश की ‘ आर्थिक ‘ स्थिति बहुत ही ख़राब हो गई थी, लेकिन कैलाश ने हार नहीं मानी।

 

 

 

 

लेकिन ईश्वर से कैलाश की ख़ुशी देखी नहीं गई और उन्होंने सगुन को अपने पास बुला लिया। कैलाश पर मानो बज्रपात ही हो गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और दोनों बच्चों के लालन – पालन में मनोयोग से लग गया।

 

 

 

 

 

एक दिन शाम का समय था, गांव के रघु चाचा कैलाश के पास आए। उन्होंने कहा, ” कैलाश बुरा न मानो तो एक बात कहूं ? ” ” कहो चाचा क्या कहना चाहते हो? ” कैलाश ने कहा।

 

 

 

चाचा ने बिना भूमिका बांधे ही कहा, ”  तुम अपनी दूसरी शादी क्यूं नहीं कर लेते ? दो बच्चों का पालन – पोषण गृहस्थी का काम सब एक साथ कैसे संभाल पाओगे ? जिंदगी की डगर में तुम्हें  कभी न कभी और  कहीं न कहीं किसी की आवश्यकता पड़ेगी ही। तब तुम किसे ढूंढोगे ? ”

 

 

 

” कैलाश को चुप देखकर चाचा ने फिर कहा मैं अभी जा रहा हूं, कल शाम के समय फिर आऊंगा। तब तक तुम्हे सोच विचार करने के लिए काफी समय मिल जाएगा।  ” इतना कहकर रघु चाचा चले गए।

 

 

 

 

दूसरे दिन शाम के समय रघु चाचा ने फिर आये। कैलाश ने चाचा का यथो चित आदर सत्कार किया।  चाचा जी भी बड़े चतुर सुजान थे। वे  समझ गए कि काम बन गया है। दोनों के वार्तालाप के बाद कैलाश ने कहा कि, ” चाचा यह हमें अनुचित लग रहा है। समाज के लोग क्या कहेंगे ? ”

 

 

 

” समाज का तो यही कार्य है दूसरों पर  उंगली उठाना,  लेकिन कही पर जीवन की गाड़ी रुक जाने के बाद यही तथा – कथित सामाजिक लोग सामने नहीं आते। इसलिए ऐसे सामाजिक लोगों की परवाह छोड़कर अपनी परवाह करो। ” चाचा ने कैलाश से कहा

 

 

 

उसके बाद चाचा ने फिर से कहा, ” मैंने एक कन्या देख रखी है। उसके घर वालों से बात – चीत भी हो चुकी है। सभी लोग रजामंद है।  परसों का दिन निश्चित हुआ है। दुर्गा मंदिर में सादगी के साथ  विवाह संपन्न होगा। ”

 

 

 

 

इसके बाद चाचा चले गए।  नियत समय पर  कैलाश और रागिनी का विवाह  संपन्न हो गया। रागिनी कैलाश के घर आ गई। रागिनी ने अपने मोहपास में कैलाश को ऐसा बांधा कि उसे अपने बच्चों की सुध ही न रही।

 

 

 

 

इसका परिणाम यह हुआ कि रवी की तबीयत ख़राब रहने लगी। परिणाम स्वरुप रवि धीरे – धीरे ढलने लगा और अस्त होने से पहले अपनी बहन सुधा से कहा, ” हमारे अस्त होने का समय आ गया है, लेकिन ‘ दीदी ‘ तुम चिंता में मत डूबना। ”

 

 

 

इसपर सुधा ने रोते हुए कहा, ”  हमारे जीवन का तुम्ही एक सहारा थे। अब तुम भी जा रहे हो  और हमें कह रहे हो चिंता में मत डूबना, यह कैसे संभव है। .”

 

 

 

इसपर रवि ने कहा, “आज के तीसरे दिन मैं गांव के बाग में तुम्हें  एक बड़े बकरे के रुप में मिलूंगा। तुम मुझे पहचान लेना और मैं तुम्हारी सब व्यवस्था कर दिया करुंगा। इसके बाद रवि की मृत्यु हो गयी। ”

 

 

 

चीख – पुकार के बीच रवि का दाह संस्कार कर दिया गया। कैलाश को रागिनी से ही फुर्सत नहीं थी तो सुधा का कैसे ख्याल रखता था?आज तीसरा दिन था। सुधा को रवी की बातों का ध्यान था।

 

 

 

वह गांव के बाग में गई तो ,वहां पहले से ही एक बड़ा सा बकरा एक पेड़ के नीचे खड़ा था। सुधा को देखते ही वह ख़ुशी से उछलने लगा और उसे देखकर सुधा रोने लगी।

 

 

 

” दीदी क्यों रो रही हो ? भगवान ने हमें इसी स्वरुप में आपकी देख भाल करने के लिए कहा है। आप थोड़ा रुको मैं अभी आता हूं। ” बकरे के रूप में रवि ने कहा और कुछ देर में कही से कुछ खाने – पीने का सामान लाकर सुधा के सामने रख दिया।

 

 

 

उसके बाद उसने कहा, ” दीदी खा लो और रोज ऐसे ही यहां आना।  मैं रोज ऐसे ही सामान लेकर आऊंगा। ” अब रोज सुधा वहाँ आने लगी और रवि बकरे के रूप में ढेर सारे खाने – पीने का सामान लेकर आता।

 

 

 

 

दिन बीतते गए सुधा की एक बकरे से मुलाकात की चर्चा रागिनी के कानों तक भी पहुंची। रागिनी ने कैलाश के कान भरे और बकरे को मारने के लिए एक कसाई को कह दिया।

 

 

 

 

यह बात बकरे को मालूम हो चुकी थी। शाम के समय सुधा बाग़ में पहुंची तो बकरा उदास था।  सुधा के पूछने पर उसने सब बात बता दिया और बोला, ”  दीदी आज आपके जाने के बाद हमारी हत्या हो जाएगी। ”

 

 

 

 

” मैं घर ही नहीं जाऊंगी। ” सुधा ने कहा।

 

 

 

 

इसपर रवि ने कहा, ” आप चिंता मत करो। आज के तीसरे दिन सामने वाले बड़े तालाब में मैं हंस के रुप में जन्म लेकर आपकी सहायता करता रहूँगा, इसलिए आप उदास मत होना। ”

 

 

 

 

तीसरे दिन सुधा तालाब के किनारे थी। उसने देखा एक बड़ा सा हंस अपने साथियों के साथ उसकी तरफ आ रहा था। सुधा पहचान गई , वह बड़ा सा राजहंस बोला, ”   दीदी आपको कोई परेशानी तो नहीं हुई न। सुधा उस राजहंस को सब कुछ बताती चली गई कि  रागिनी उसे कितना प्रताड़ित करती है।

 

 

 

” कुछ समय धीरज रखो। मैं उसे इतना प्रताड़ित करुंगा कि उसे मजबूर होकर आपका ध्यान रखना होगा। ” रवि ने गुस्से से कहा। काफी दिन बीतने पर रागिनी ने फिर पता लगा लिया कि सुधा एक राजहंस से मिलने बड़े तालाब पर जाती है।

 

 

 

 

एक दिन शाम के समय सुधा तालाब पर गई और एक बड़ा सा हंसो का समूह सुधा के सामने आया। उसमे वह बड़ा राजहंस भी था। हंसो के समूह ने सुधा के लिए खाने – पीने की व्यवस्था कर रखा था।

 

 

 

” दीदी रागिनी ने बहेलियों को हमारे पीछे लगा दिया है। आप कल से तालाब पर मत आना , कारण तो आपको ज्ञात है ही। ” हंस के रूप में रवि ने कहा।

 

 

 

 

” परसों आप उसी बाग में उसी वृक्ष के निचे मिलना जहां मैं आपसे बकरे  के रुप में मिला था। वहां मैं आपसे  तोता के रुप में मिलूंगा। आप हमें पहचान जाएंगी, क्योंकि मैं सबसे बड़ा रहूंगा।” रवि ने कहा।

 

 

 

 

तीसरे दिन सुधा बाग में आम के वृक्ष के नीचे खड़ी थी, तभी बहुत सारे तोता सुधा के समीप आ गए। उसमें से एक बड़ा सा तोता बोला, ”  दीदी मैं फिर आपकी सहायता के लिए  प्रस्तुत हूं और उसने अन्य से कहकर सुधा के लिए सारी व्यवस्था करवा दी। दिन बीतते रहे रागिनी को पता चला कि सुधा की सहायता एक तोता करता है।

 

 

 

 

 

उसने तोता को मारने  के लिए एक बहेलिए को लगा दिया। सुधा जब शाम को तोता रुपी रवी से मिलने गई तो रवि ने कहा, ”  दीदी अब आपके दुखों का अंत अवश्य होगा।मैं वहां घर के पीछे  साग  रूप में जन्म लूंगा और रागिनी मुझे उखाड़ कर खा जाएगी, उसके बाद मैं वहां रागिनी के पुत्र रुप में जन्म लूंगा, लेकिन मैं आपके लिए मैं रवी ही रहूंगा। ”

 

 

 

 

 

एक दिन रागिनी घर के पीछे किसी काम से गई। वहां बहुत ही सुन्दर साग का पौधा देखा। वह उसे उखाड़ लाई और पकाकर खा गई। समय बीतता गया। कालांतर में उसने एक सुन्दर पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह लड़का जन्म के समय से ऐसा ‘ क्रंदन ‘ करने लगा कि जैसे अब उसकी जान चली जाएगी।

 

 

 

 

गांव की सभी महिलाओं के गोंद में उसे दिया गया,  लेकिन उसका क्रंदन बढ़ता ही गया, तभी एक बूढी औरत ने कहा कि इसे सुधा की गोंद में दे दो शायद चुप हो जाय।

 

 

 

 

 

कैलाश ढूंढते हुए सुधा के पास पहुंचे और सारी बात बताकर बोले, ”  सुधा तुम भी प्रयास करो शायद तुम्हारा भाई तुम्हारे गोंद में आने के पश्चात् चुप हो जाए? ”

 

 

 

 

सुधा बच्चे को गोंद में लेने के पश्चात बाहर आकर लोरी सुनाने लगी। लोरी सुनते ही  बालक सुधा की गोंद में आराम से सो गया। यह देखकर गांव की सारी औरतें आश्चर्य चकित रह गई। बच्चा जब भी रोता सुधा लोरी गाकर उसे चुप करा देती। अब सुधा की जिंदगी आसान और अच्छी हो गयी।  वह ख़ुशी से रहने लगी।

 

 

 

 

 

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