Kashi ka Assi PDF Hindi / काशी का अस्सी / Kashinath Singh All Books Hindi

Kashi ka Assi PDF Hindi इस पोस्ट में काशीनाथ सिंह द्वारा लिखित काशी का अस्सी बुक के बारे में दिया गया है।  आप काशी का अस्सी बुक लिंक पर क्लिक करके खरीद सकते हैं।

 

 

 

1- Apanaa-Raastaa lo baba

 

 

 

काशीनाथ सिंह की बुक्स और उपन्यास नीचे की लिंक से खरीद सकते हैं——

 

 

 

 

 

1- kashi ka assi (Hindi) काशी का अस्सी 

 

2- Aachhe Din Pachhe Gaye अच्छे दिन पाछे गए 

 

3- Ghar Ka Jogi Jogda

 

4- Aadminama आदमीनामा 

 

5- Log Bistron Per लोग बिस्तरों पर 

 

 

 

कशीनाथ सिंह के बारे में – 

 

 

 

काशीनाथ सिंह हिंदी साहित्य के एक जाने-माने कवि व उपन्यासकार है। इनका जन्म कवियों और लेखकों की स्थली उत्तर प्रदेश में हुआ था।

 

 

 

 

उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में जीयन पुर गांव में एक किसान नागर सिंह के घर काशीनाथ का जन्म 1 फरवरी 1937 को हुआ था।

 

 

 

 

इनके पिता प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक थे। अध्ययन के साथ ही इनके पिता अपना पैतृक कार्य कृषि भी करते थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा इनके गांव में ही प्राप्त हुई थी। इनका हिंदी साहित्य से बहुत लगाव था, इसलिए ही इनकी लेखनी कला उत्तरोत्तर प्रगति करती गई।

 

 

 

 

इन्होने स्नातक, परास्नातक के साथ ही P.H.D. की उपाधि कशी विश्वविद्यालय से प्राप्त किया था। कशीनाथ सिंह को अपने विद्यार्थी जीवन में ही जिंदगी की सच्चाइयों का सामना करना पड़ा था और उनके श्री मुख से निकल पड़ा अपने दुखों के बदले दूसरे के दुख को देखो तब आपको लगेगा कि दूसरों के दुख के सामने अपना दुख कुछ भी नहीं है ,

 

 

 

 

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शोध के दौरान इनके गुरु आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी थे। जो किन्ही कारणों से निकाल दिए गए। बहुत प्रयास करने के बाद भी कोई अध्यापक इनके शोध को अपने निर्देशन में पूर्ण कराने का साहस नहीं जुटा पाया। तब उन्होंने उस समय के कम लोकप्रिय अध्यापक करुणा पति त्रिपाठी के निर्देशन में अपने शोध को पूर्ण किया था।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

अगर जिंदगी जीना है तो बीती हुई पिछली बातों को भूलना पड़ता है क्योंकि बीती हुई बातें याद करने से जीवन का मार्ग कठिन हो जाता है। जो सामने मौजूद समय होता है, उसे ही याद रखना चाहिए। वर्तमान समय में अपना सबसे कही परेशानी में रहे तो उसकी सहायता करनी चाहिए।

 

 

 

 

 

बिनीता को अपनी जिंदगी के बीते हुए पल सामने शमसेर को देखकर याद हो गए थे। कैसे शमसेर नेउसकी दुनिया को उजाड़ दिया था।

 

 

 

 

 

गिरीश बिनीता का पति था। एक मिलन सार व्यक्ति सदा ही सच्चाई का साथ देने वाला। जैसा कि अक्सर होता है। सच्चाई कहने वालों को परेशान किया जाता है।

 

 

 

 

 

 

शमसेर एक नायब तहसील दार था। वह अपनी देख-रेख में ही कई भूखंड का घोटाला करवा चुका था। लेकिन गिरीश एक जिम्मेदार और जागरूक इंसान था। उसके प्रयास से एक विधवा की जमीन बच गयी थी। लेकिन शमसेर को चार साल की सजा हो गयी थी।

 

 

 

 

 

शमसेर इसी बात से चिढ़कर गिरीश को परेशान करता था और सच्चाई की कीमत गिरीश को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। विनीता एक लड़के और एक लड़की को लेकर परेशान हो गयी थी। लेकिन अपनी सिलाई के बल पर खुद को खड़ा किया। आज गिरीश सिलाई सेंटर में कई लड़कियां सिलाई सीखकर अपना खुद का व्यवसाय  कर रही है।

 

 

 

 

 

आज वही शमसेर अपनी एक मात्र लड़की को लेकर विनीता के सामने खड़ा था और अपनी लड़की को सिलाई सिखाने का आग्रह कर रहा था।

 

 

 

 

 

उसकी निगाहे झुकी हुई थी। विनीता ने उस लड़की का वर्तमान ( मौजूद ) समय खराब न हो इसलिए हामी भर दी ताकी वर्तमान से उसका भविष्य भी संवर जाये।

 

 

 

 

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