Thursday, 22 October, 2020

Positive Thinking in Hindi PDF / सकारात्मक सोच की कहानी फ्री


Positive Thinking in Hindi PDF

Positive Thinking in Hindi PDF मित्रों इस पोस्ट में The Power Of Positive Thinking Pdf in Hindi  के बारे में कहानियां दी गयी हैं।  आप सकारात्मक सोच की कहानी ( Books For Positive Thinking in Hindi ) यहां से इसे फ्री में Download कर सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

इसे भी पढ़ें —– जहां प्रकाश होगा वहां किरण भी होगी और जहां किरण दिखेगी वहां प्रकाश का होना अनिवार्य है। दोनों एक दूसरे के पूरक है, एक के बिना दूसरे की पहचान मुश्किल है।

 

 

 

 

प्रयाग फ़ूड लिमिटेड नामक कंपनी में किरण Head manager थी और सुचित्रा पैकिंग लिमिटेड में प्रकाश भी  Manager था। दोनों की Life में कोई अभाव नहीं था। दोनों ही Talented थे और अपने-अपने कार्य को बहुत ही सतर्क होकर करते थे। कंपनी से लेकर घर तक कोई शिकायत नहीं थी।

 

 

 

 

 

लेकिन जब बात बिगड़नी होती है तब दाल में नमक कम है की शिकायत उत्पन्न हो जाती है। दोनों की Payment में सिर्फ और सिर्फ One Thousand  रुपये का अंतर था।

 

 

 

 

यह बात किरण को हमेशा ही चुभती थी, जबकि प्रकाश हमेशा ही किरण को समझाता थी कि रुपये  के सिक्कों को सीधा देखो या उल्टा वह रुपया ही रहेगा।

 

 

 

 

तुम्हारी Payment कम है तो क्या हुआ पैसा आएगा तो अपने घर में ही, लेकिन किरण को यह बात समझ में आती ही नहीं थी। यह समस्या प्रकाश ने अपने ससुर मुरारी लाल को बता दिया था।

 

 

 

 

अचानक से मुरारी लाल अपने बेटी के घर आ धमके। उन्हें देखकर किरण को अचरज हुआ क्योंकि मुरारी लाल बगैर सुचना के आते ही नहीं थे। अपने आने के पहले सूचित अवश्य कर देते थे इसीलिए किरण हैरान हो रही थी।

 

 

 

 

एक दो दिन रुकने के पश्चात् मुरारी लाल ने अपने घर जाने की इच्छा जाहिर की।  किरण के रोकने पर मुरारी लाल ने कहा, “यह तुम्हारा घर तो है नहीं तुम्हारा अपना घर होता तब मैं कुछ दिन अवश्य रुक जाता।”

 

 

 

 

किरण ने कहा, “आप कैसी बात कर रहे है पिता जी यह हमारा घर नहीं है तो किसका है ?  क्या मैं और प्रकाश अलग-अलग हैं, जो आप इसे हमारा घर नहीं समझ रहे है। जबकि किरण और प्रकाश एक है और जहां प्रकाश है वहीं किरण का भी निवास है।”

 

 

 

 

 

“फिर तो दोनों में Tension ही नहीं होनी चाहिए।” मुरारी लाल ने कहा। किरण को सब अमझ में आ गया था। इसके बाद सारा विवाद ख़त्म हो गया और प्रकाश और किरण बहुत ही ख़ुशी से रहने लगे।

 

 

 

 

Moral Of This Story – समस्या कोई भी हो उसका समाधान तुरंत होना चाहिए, अन्यथा बढ़ने के साथ ही समाधान मुश्किल हो जाता है।

 

 

 

 

2- बांस की एक छोटी शाखा अपने परिवार से बिछड़ने के बाद भी कलाकार के तरासने के साथ ही उसके होंठो से लगकर कितनी सुंदर और सुरीली आवाज निकालती है, जो आज भी लोगों को और सभी जीवों को अपनी तरफ खींच लेती है या कहे कि सभी मुरली की आवाज की तरफ खींचे चले आते है।

 

 

 

 

शायद इसी मधुर आवाज का प्रभाव रहा होगा जो योगेश्वर श्रीकृष्ण के द्वारा बजाये जाने पर सभी खिंचे हुए उनके पास चले आते थे। यहां तक लोग कहते है कि योगेश्वर के द्वारा बजाई हुई मुरली की तान पर भोलेनाथ भी झूमने पर विवश हो गये थे। कहीं भी घर में या बाहर मीठी आवाज से सफलता की संभावना अधिक होती है।

 

 

 

 

विपुल एक पढ़ा-लिखा लड़का था। अपने बुद्धिमानी के कारण ही वह टोक्यो इंटेरनेशनल कंपनी के सहायक प्रबंधक के पद को शोभित कर रहा था।

 

 

 

 

बचपन में ही उसने एक मदारी को मुरली बजाते हुए देखा था, जिससे उसके मन में भी मुरली बजाने की इच्छा बलवती हो गई थी। काफी अनुनय- विनय करने के उपरांत ही मदारी उसे सिखाने  के लिए तैयार हुआ।

 

 

 

 

एक वर्ष के कठिन परिश्रम से उसे यह ज्ञान प्राप्त हुआ था। विपुल चाहता तो मुरली को पैसा कमाने का माध्यम भी बना सकता था, लेकिन उसने अपने शौक का सौदा नहीं किया जो उचित ही था।

 

 

 

 

उसे जब भी मौका मिलता था अपना शौक पूरा कर लेता था। घर हो Office हो कहीं भी उसे कोई नहीं रोकता था। आज-कल इस कला को जीवित रखने वाले अँगुलियों पर गिने जाते है।

 

 

 

 

टोक्यो इंटेरनेशनल कंपनी के मालिक अकीरा सर उन दिनों भारत आये हुए थे। अपने Branch को उन्होंने निरीक्षण किया। सब कुछ कुशल हाथों द्वारा संचालित था।

 

 

 

 

अकीरा सर को कंपनी के तारफ से जापान जाने से पहले उनके स्वागत में एक party का आयोजन किया गया था। Company के प्रबंधक रामलाल ने विपुल को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए कहा था।

 

 

 

 

अकीरा सर के स्वागत में Party के पश्चात् विपुल का  Program था। विपुल का Program  शरू हो चुका था। सभी अपनी-अपनी जगह पर जड़वत बैठे हुए थे।

 

 

 

 

एक घंटे का समय कब ख़त्म हो गया पता ही नहीं चला। मुरली की आवाज बंद होते ही सभी जैसे नींद से जाग उठे। अकीरा सर तो इतने मुग्ध हो गए कि आधे घंटे फिर से मुरली बजाने का आग्रह किया।

 

 

 

 

 

आधे घंटे के पश्चात् विपुल को अकीरा सर ने बहुत ही शाबासी दी और अपने खर्चे पर जापान ( Japan )  आने का आग्रह किया। यह  भारतीय कला का और भारत का और साथ ही साथ विपुल का भी सम्मान था।

 

 

 

Moral Of This Story – कला की क़द्र हर जगह होती है। 

 

 

 

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