Ramcharitmanas PDF in Hindi / रामचरित मानस फ्री में डाउनलोड करें

Ramcharitmanas PDF in Hindi रामचरित मानस को गोस्वामी तुलसी दास जी ने १६ वीं शताब्दी में अवधी भाषा में लिखा था।  Ramcharitmanas in Hindi PDF एक महान कृति है।

 

 

 

 

 

 

Ramcharitmanas PDF in Hindi

 

 

 

रामचरित मानस को तुलसी रामायण या तुलसीकृत रामायण भी कहा जाता है।  हिन्दू धर्म के माननेवालों में रामचरितमानस का बहुत महत्व है और उत्तर भारत में इसका ख़ासा महत्व है।

 

 

 

Shri Ramcharitmanas Katha की रचना उस समय में हुई, जब हिन्दू जनमानस अपने शौर्य को भूल चुके थे और भारत में विदेशियों के पैर पूरी तरह से जम चुके थे। 

 

 

 

 

हर तरफ आक्रांताओं का राज था।  उसी समय महान भक्त कवि तुलसीदास जी का प्रादुर्भाव हुआ और उन्होंने हिन्दू समाज में एक नयी चेतना का निर्माण किया।

 

 

 

 

आईये रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानते हैं…..( Ramcharitmanas in Hindi Book ) 

 

 

 

1 – रामचरितमानस की हर चौपाई को मंत्र के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है और कहीं – कहीं किया भी जाता है। 

 

 

2- रामचरितमानस विश्व के सर्वाधिक प्रसिद्द ५० काव्य ग्रंथो में से एक है। 

 

 

3- श्री रामचरितमानस में कुल ७ काण्ड है।  इन्हे ७ सोपान भी कहा जाता है।  

 

 

 

बालकाण्ड – रामचरितमानस की शुरुआत बालकाण्ड से शुरू होती है।  इसमें कुल ३६१ दोहे हैं। इस काण्ड प्रभु श्रीराम के जन्म और बाल्यकाल की घटनाओ का वर्णन है।

 

 

 

अयोध्याकाण्ड – इसमें भगवान श्रीराम की शिक्षा – दीक्षा, राज्याभिषेक, कैकेयी का कोपभवन में जाना, महाराजा दशरथ का प्राण त्यागना और भगवान राम के वनवास और भरत के लिए राजगद्दी मांगना जैसी प्रमुख घटनाएं हैं। इसमें कुल ३२६ दोहे हैं।

 

 

 

अरण्यकाण्ड – इस काण्ड में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के वन – गमन, मारीचि – वध और सीता हरण जैसी घटनाओं का वर्णन है।

 

 

 

किष्किंधाकांड – इस काण्ड में प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण का माता सीता को ढूढते हुए किष्किंधा पर्वत पर आना, हनुमान जी का मिलना, बाली वध और सुग्रीव से दोस्ती जैसी घटनाएं हैं।

 

 

 

सुंदरकांड – रामायण में सुंदरकांड बहुत अधिक महत्व है।  सुंदरकांड पूरी तरह से हनुमान जी द्वारा किये गए कार्यों पर आधारित है, जैसे उनका लंका जाना और लंका – दहन आदि।

 

 

 

लंका काण्ड – इस काण्ड में श्रीराम – लक्ष्मण सहित पूरी वानरी – सेना का लंका में प्रवेश, युद्ध और राक्षस – सेना सहित, मेघनाद, रावण का वध शामिल है।

 

 

 

उत्तर काण्ड – इस काण्ड में कागभुसुंडि और गरुण संवाद महत्वपूर्ण है।  इस काण्ड में भगवान श्रीराम माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी, सुग्रीव, विभीषण आदि के साथ अयोध्या वापस लौटते हैं और इसी के साथ ही रामचरितमानस का समापन होता है।

 

 

 

रामचरितमानस की नौ महत्वपूर्ण बातें 

 

 

 

Ramcharitmanas PDF in Hindi
Ramcharitmanas PDF in Hindi

 

 

 

रामचरितमानस को सभी लोग जानते है कि यह हिन्दू धर्म में सबसे उच्च स्थान रखता है और रामचरितमानस की चौपाइयों में गोस्वामी तुलसी दास ने जो भी बातें समझाने का प्रयास किया है वह इस समय में भी अक्षरशः सही प्रतीत होती है।

 

 

 

 

रामचरितमानस में व्यक्त की हुई बातो को मनुष्य अपने जीवन में उतारकर अन्य दुश्वारियों से बच सकता है क्योंकि रामचरितमानस की बातें आज भी मानव जीवन प्रासंगिक है।

 

 

 

 

एक बार रावण मारीच के पास गया और उससे कहने लगा, “कि आपकी हमे सहायता की अति आवश्यकता है।”

 

 

 

 

मारीच ने पूछा, “आप तो खुद ही सामर्थ्यवान है आपको हमारी सहायता की क्यों और कैसे आवश्यकता आ गई है ?”

 

 

 

 

रावण ने मारीच से कहा, “तुम स्वर्ण मृग बन जाओ क्योंकि हमे अपने भगिनी के बेइज्जती का बदला लेना है। तुम स्वर्ण मृग बनकर पंचवटी में उस पर्ण कुटी के पास जाओ, जहां दोनों राजकुमार एक सुंदर स्त्री के साथ रुके हुए है। तुम दोनों राजकुमारों में से एक को अपने छल से दूर ले जाना और जब तुम्हे बाण लगेगा तब दूसरे राजकुमार का नाम लेकर उसे सहायता के लिए पुकारना फिर मैं पीछे से जाकर उस सुंदर स्त्री का हरण कर लूंगा। इस तरह मैं अपनी भगिनी का प्रतिशोध ले लूंगा।”

 

 

 

 

 

तब मारीच ने रावण को समझाने का प्रयास करते हुए कहा, “हे रावण, जब मैं ताड़का और सुबाहु के साथ ही ऋषियों का यज्ञ विध्वंश करने के लिए गया था तब उस सांवले राजकुमार ने मुझे बिना फर के तीर से मारकर इतनी दूर फेक दिया। अगर वह फर वाला तीर होता तब तुम हमसे बात नहीं कर रहे होते अर्थात मैं कब का मर चुका होता। ऐसे राजकुमार को तुम साधारण मनुष्य समझकर भूल कर रहे हो।”

 

 

 

 

 

तब रावण मारीच की बात सुनकर क्रोध से भर गया और मारीच को मारने के लिए झपट पड़ा। तब मारीच ने अपने मन में सोचा इस दुष्टात्मा के हाथ से मरने से अच्छा है कि मैं श्री राम के हाथो ही मारा जाऊं क्योंकि श्री राम के हाथो मारे जाने पर हमारी मुक्ति संभव है।

 

 

 

 

उसी समय मारीच के मन में ऐसा विचार आया था कि शस्त्र धारी अपने राजदार, समर्थवान व्यक्ति, मुर्ख धनवान व्यक्ति, वैद्य भाट, कवि और रसोइयां की बात तुरंत मानने में ही भलाई है। इतना सोचते ही मारीच स्वर्ण मृग बनने के लिए तैयार हो गया।

 

 

 

 

 

रामचरितमानस में ही एक प्रसंग ऐसा आया है कि गोस्वामी तुलसी दास के कथनानुसार किसी को भी दोष नहीं लगाया जाना चाहिए क्योंकि जब भी जैसा होने वाला रहता है तब उसी तरह के व्यक्तियों की सहायता मिलने लगती है। यहाँ तक कि व्यक्ति खुद चलकर सहायता मांगने पहुंच जाता है।

 

 

 

 

 

सत्यकेतु नामक राजा के दो पुत्र थे और दोनों बड़े ही पराक्रमी थे। राजा के बड़े लड़के का नाम प्रतापभानु था और छोटे लड़के का नाम अरिमर्दन था।

 

 

 

 

राजा सत्यकेतु अपने बड़े लड़के का राजतिलक कर स्वयं हरिनाम में लीन होने जंगल की तरफ चले गए। अब प्रतापभानु अपने मंत्री और छोटे भाई की सहायता से हर तरफ के राज्य पर विजय प्राप्त करते हुए चक्रवर्ती राजा बन गया था।

 

 

 

 

लेकिन जैसा पहले ही उल्लेख हो चुका है। जैसी घटना होने वाली रहती है मनुष्य खुद उसके पास चला जाता है। एक दिन प्रतापभानु जंगल में अपने सैनिक लेकर आखेट करने गए। अचानक एक बाराह उनके सामने आ गया।

 

 

 

 

 

प्रतापभानु उस बाराह के पीछे अपना घोडा दौड़ाने लगे और उस बाराह के ऊपर सर संधान करने लगे। अगर वह साधारण बाराह होता तो कब का मर गया होता।

 

 

 

 

लेकिन वह तो मायावी निशाचर ने बाराह का रूप बनाया हुआ था और प्रतापभानु को उलझाकर घनघोर जंगल में ले गया। रात्रि हो गई थी।

 

 

 

 

राजा के सभी सैनिक पीछे छूट गए थे। प्रतापभानु स्वयं थक चुके थे। उन्हें बहुत प्यास लगी हुई थी। प्रतापभानु से पराजित होकर एक राजा उसी घनघोर जंगल में उस निशाचर से मित्रता कर के कपट मुनि बनकर एक आश्रम बनाकर बैठा हुआ था।

 

 

 

 

प्रतापभानु प्यास और थकान से व्याकुल होकर उस कपट मुनि के आश्रम की तरफ बढ़ चले। कपट मुनि ने राजा को देखकर आंखे बंद कर लिया जैसे बहुत तपस्या में लीन हो।

 

 

 

 

राजा ने उसे सिद्ध मुनि जानकर प्रणाम किया तो उसने आंखे खोलकर राजा को बैठने के लिए कहा। राजा ने उस मुनि को अपना परिचय प्रतापभानु के मंत्री के रूप में दिया।

 

 

 

 

तब वह कपट मुनि बोला, “तुमने राजनीति का अच्छा परिचय दिया है लेकिन मैं तुम्हारे बारे में कुछ जानता हूँ। तुम्हारे पिता का नाम सत्यकेतु है और तुम्हारे भाई का नाम अरिमर्दन है और तुम्हारा नाम तो प्रतापभानु है। तुम एक पराक्रमी राजा हो।”

 

 

 

 

अब तो प्रतापभानु को उस कपट मुनि पर अपार श्रद्धा हो गई। तब राजा ने उस मुनि से उसका नाम पूछा। तब कपट मुनि ने कहा, “मैं त्रिकाल दर्शी हूँ मेरा कभी क्षय नहीं होता अर्थात मैं तीन युग से ही ऐसे ही एक शरीर में स्थित हूँ। मेरा नाम ‘एकतनु’ है। अब तुम यहां विश्राम करो मैं तुम्हारे घोड़े के साथ ही तुम्हे तुम्हारे नगर पहुंचा दूंगा।”

 

 

 

 

 

राजा के विश्राम करते ही निद्रा ने घेर लिया तब वह निशाचर जिसने बाराह बनकर राजा को यहां तक लाया था। राजा को उनके घोड़े के साथ ही उनके नगर पहुंचा दिया था।

 

 

 

 

पहुंचाने से पहले ही कपटी मुनि ने प्रतापभानु को कह दिया था यह सब वार्ता हम लोगो के बीच में ही रहनी चाहिए अर्थात यह बात अगर छठे कान में गई तो तुम्हारे विनाश को कोई रोक नहीं सकता है।

 

 

 

 

इस तरह से कपट मुनि ने बाराह रूपी निशाचर के साथ मिलकर राजा के द्वारा भोजन में ब्रह्मणो को आमिश खिलाकर ब्रह्मणो के श्राप के द्वारा प्रतापभानु का विनाश करवाकर उनके राज्य पर आधिपत्य जमा लिया।

 

 

 

Ramcharitmanas in hindi Pdf Free Download रामायण यहां से डाउनलोड करें।

 

 

Ramcharitmanas Pdf in Gujarati

 

Ramcharitmanas Pdf in Telugu

 

Ramcharitmanas Pdf in Marathi

 

Ramcharitmanas Pdf in Oriya

 

Ramcharitmanas PDF In English

 

Ramcharitmanas Pdf in Bengali

 

Ramcharitmanas Pdf in Tamil

 

 

 

Ramcharit Manas Ki Chaupai Se जीवन की  समस्या का समाधान 

 

 

 

रामचरित मानस हिन्दू धर्म में अपना उच्च स्थान रखता है और रामचरित मानस की चौपाई में जीवन की समस्याओ का समाधान समाहित है। अगर व्यक्ति उन चौपाई को सकारात्मक ढंग से अपने जीवन में उपयोग करे तो उसे हर तरह की समस्या से मुक्ति संभव है।

 

 

 

 

यहां चौपाई का उदाहरण दिया जा रहा है जो गोस्वामी तुलसी दास के द्वारा विरचित है। अंगद हनुमान रन गाजे, हांक सुनत रजनीचर भाजे।।

 

 

 

यह चौपाई लंका कांड की है। जब श्री राम और पराक्रमी रावण का संग्राम चल रहा था। हनुमान जी और अंगद की वीरता के किस्से लंका के हर कोने में गूंज रहे थे। यहां तक अगर कोई दूसरा वानर वीर अगर रण में गर्जना करता था तब सभी निशाचर भयाक्रांत हो जाते थे।

 

 

 

 

 

उन्हें लगता था कि अंगद और हनुमान आ गए है और निशाचर रण से पलायन करने लगते थे। इसी तरह मानव के जीवन में ‘समस्या’ के रूप में निशाचर त्रास देते है जिससे मानव विचलित हो जाता है। तब ‘समस्या’ के रूप में निशाचरो को भगाने के लिए हनुमान जी की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर मिष्ठान को अर्पण करे और अंगद हनुमान रन गाजे, हांक सुनत रजनीचर भाजे।। इस चौपाई का 108 बार जाप करे तो उसके जीवन में समस्या के रूप में असुर शक्तियों का अवश्य नाश होगा और सुख समृद्धि की बढ़ोत्तरी होगी।

 

 

 

रामचरित मानस की मुख्य चौपाई और उनके लाभ 

 

 

 

रामनवमी प्रत्येक मनुष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर रामनवमी पर रामचरित मानस का पाठ किया जाय तो मनुष्य की हर बाधाए समाप्त होकर सौभाग्य की वृद्धि होती है।

 

 

 

रामनवमी से एक दिन पूर्व ही रामचरित मानस का पाठ शुरू करके रामनवमी के दिन समाप्त करने से मनुष्य का जीवन खुशियों से भर जाता है।

 

 

 

अगर रामचरित मानस का पाठ संभव न हो सके तब रामचरित मानस की 10 चौपाई से ही सम्पूर्ण रामचरित मानस पाठ का फल प्राप्त किया जा सकता है। गोस्वामी तुलसी दास जी ने समस्त मानव के कल्याण हेतु जो कल्याकारी चौपाइयां लिखी है वह नीचे निम्नलिखित है।

 

 

 

 

 

1. मनोकामना की पूर्ति और सर्वबाधा शांति हेतु कवन सो काज कठिन जग माही। जो नहि होइ तात तुम्ह कही।। 

 

 

तुलसी कृत यह प्रसंग सीता खोज का है। जब हनुमान जी को ऋक्षराज जांबवंत ने कहा था हे पवन पुत्र आपके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है जो आप नहीं कर सकते है। इस चौपाई के जाप से मनोकामना की पूर्ति होकर सभी बाधाए शांत हो जाती है।

 

 

 

2. भय और शंसय निवारण हेतुराम कथा सुंदर कर तारी। संसय विहंग उड़ावन हारी।। 

 

 

तुलसी कृत यह प्रसंग काक भुसुंडि और पक्षी राज गरुड़ के संवाद का है। जिसमे श्री राम भक्त काक भुसुंडि ने गरुड़ से कहा, “यह राम कथा इतनी सुंदर है जितनी सुंदर हाथो द्वारा बजाई गई तालियों की मधुर ध्वनि। जिस प्रकार करतल की आवाज सुनकर पक्षी उड़ जाते है।

 

 

 

 

उसी तरह आप भी राम की कथा रूप करतल ध्वनि से अपने मन के संसय रूपी पक्षी को उड़ाकर भगा दीजिए। इस चौपाई के जाप से मनुष्य के मन से भय और संसय नष्ट हो जाते है और कार्य सिद्ध होता है।

 

 

 

3. अनजान स्थान पर भय निवारण हेतु – तुलसी कृत यह चौपाई अरण्य कांड की है जहां मुनी भगवान से अपनी रक्षा के लिए कहते है। माम भिरक्षय रघुकुल नायक। घृत वर चांप रुचिर कर सायक।। 

 

 

मनुष्य के जीवन काल में ऐसा क्षण भी आता है जब वह किसी अज्ञात जगह पर चला जाय और उसे नहीं मालूम रहता है कि इस जगह पर कौन से देवता का निवास है। ऐसी स्थिति में उपरोक्त चौपाई का प्रयोग करने से रघुनंदन स्वयं अपने भक्त की रक्षा करते है।

 

 

 

4. भगवान की शरण प्राप्ति हेतु – सुनि प्रभु वचन हरष हनुमाना। शरणागत बच्छल भगवाना।।

 

 

तुलसी कृत यह चौपाई  सुंदर कांड की है। जब हनुमान जी माता सीता का पता लगाकर वापस आए थे तब श्री राम जी ने हनुमान जी की प्रशंसा किया था। तब हनुमान जी श्री राम के मुख से अपनी प्रशंसा सुनकर बोले, “प्रभु, मैं तो आपके शरण में हूँ और भगवान तो भक्त वत्तसल है। जो उनकी शरण में चला जाता है तो उसके दोनों हाथो में मोदक होता है। 

 

 

 

5. विपत्ति नाश के लिएराजीव नयन धरे धनु सायक। भगत विपति भंजन सुख दायक।। 

 

 

तुलसी दास जी ने इस चौपाई को बहुत ही सुंदर स्वरूप दिया है। इसके जाप से मनुष्य की हर प्रकार की विपत्ति से रक्षा होती है।

 

 

 

 

6. रोग तथा उपद्रव को शांत करने हेतुदैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहि काउहि व्यापा।। 

 

 

तुलसी कृत यह चौपाई उत्तर कांड की है। जब श्री राम जी लंका पर विजय प्राप्त करके उत्तर दिशा में अयोध्या आए ,तब राम जी का राज्याभिषेक हुआ और जहां भगवान राम का राज्य हो वहां किसी भी प्रकार का रोग और उपद्रव होने की संभावना ही नहीं है। इस चौपाई के जाप से मनुष्य हर प्रकार से सुरक्षित हो जाता है। 

 

 

 

 

7. आजीविका प्राप्त के लिए विस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।। 

 

 

तुलसी कृत यह चौपाई बाल कांड से है। जब भगवान ने अपने अंश के रूप में कोशल नरेश राजा दशरथ के गृह में अवतरण किया था। कुछ समय के उपरांत कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ ने दशरथ के चारो पुत्रो का नामकरण किया था।

 

 

 

 

श्री राम का अपने अनुज भरत पर बहुत स्नेह था। भरत के ऊपर श्री राम की विशेष कृपा थी। जो मनुष्य इस चौपाई का 108 बार जाप करता है उसकी आजीविका सदैव विद्यमान रहती है और वह श्री राम का कृपा पात्र बना रहता है।

 

 

 

8. विद्या प्राप्ति हेतुगुरु गृह पढ़न गए रघुराई। अल्पकाल विद्या सब पाई।। 

 

 

तुलसी कृत यह प्रसंग भी बाल कांड से है, जब महाराज दशरथ ने अपने चारो पुत्रो को विद्याध्ययन हेतु गुरु वशिष्ठ के पास पठाया था। यह चौपाई विशेषकर विद्यार्थी के लिए है। इसके पाठ से विद्यार्थी को समस्त विद्या की ग्रहण क्षमता का विकास होता रहता है।

 

 

 

 

9. संपति प्राप्ति के लिएजे सकाम नर सुनहि जे गावहि। सुख संपति नाना विधि पावहि।। 

 

 

तुलसी कृत यह चौपाई सभी मनुष्यो की भलाई के लिए निरूपित की गई है और इसे तुलसी दास ने उत्तर कांड में लिखा है। इस चौपाई को जो भी सासांरिक मनुष्य सुनता है या लय में गाता है उसे सुख संपति अनेक प्रकार से प्राप्त होता है।

 

 

 

 

10. शत्रु नाश के लिएबयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई।। 

 

 

तुलसी कृत यह प्रसंग उत्तर कांड से है। श्री राम के राज्य में कोई भी किसी से बैर भाव नहीं रखता था। राम जी के प्रताप से सभी एक समान थे। मनुष्य को इस चौपाई का 108 बार पाठ करने से उसके सभी दृष्य और अदृष्य शत्रु समाप्त हो जाते है और हर कार्य सरलता से निर्विघ्न संपन्न होता है। 

 

 

 

 

मित्रों यह Ramcharitmanas PDF in Hindi आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Ramcharitmanas in Hindi Book की दूसरी PDF Books Hindi के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और Tulsi Ramayan PDF  शेयर भी जरूर करें।

 

 

 

1- { PDF } Swami Vivekananda Thoughts in Hindi PDF Free Download

 

2- Ramcharitmanas Ayodhya Kand pdf

 

3- Ramcharitmanas Chaupai in Hindi With Meaning PDF

 

 

 

 

 

Leave a Comment