Discover latest Indian Blogs Sampurna Vishnu Puran PDF Hindi / संपूर्ण विष्णु पुराण PDF डाउनलोड – Hindi Pdf Books

Sampurna Vishnu Puran PDF Hindi / संपूर्ण विष्णु पुराण PDF डाउनलोड

Sampurna Vishnu Puran PDF मित्रों इस पोस्ट में से आप Vishnu Puran PDF कर सकते हैं।  आपको vishnu puran in hindi book कैसा लगा जरूर बताएं।

 

 

 

Vishnu Puran PDF Hindi Free Download विष्णु पुराण PDF फ्री डाउनलोड

 

 

 

[lwptoc]

 

 

 

 Vishnu Puran Download संपूर्ण विष्णु पुराण फ्री में यहाँ से डाउनलोड करें

 

 

 

विष्णु पुराण के बारे में 

 

 

 

विष्णु पुराण को हिन्दू धर्म में महानतम स्थान प्राप्त है। इसके प्रतिपाद्य भगवान विष्णु है। यह पराशर ऋषि द्वारा प्रणीत है। इस पुराण में विष्णु के अवतार के संबंध में बताया गया है जो इस समूचे ब्राह्माण्ड के नायक नित्य आदि कारण अनंत अनादि सच्चिदानंद एक रस है।

 

 

 

 

इस पुराण में आकाश आदि भूतों का परिमाण देवतादि की उत्पत्ति मन्वन्तर कल्प विभाग समुद्र सूर्य आदि का परिमाण पर्वत सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियों के चरित्र का अतुलनीय व्याख्या है।

 

 

 

 

 

विष्णु प्रधान होने के बाद भी यह पुराण विष्णु और शिव के अभिन्नता का परिचायक है। विष्णु पुराण में मुख्य रूप से श्री कृष्ण चरित्र का उल्लेख है। यद्यपि संक्षेप में राम कथा का भी वर्णन मिलता है।

 

 

 

 

 

अष्ठ दश पुराणों में विष्णु पुराण का बहुत ही उच्चतम स्थान है।  विष्णु पुराण में इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, वर्ण व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था के साथ ही भूगोल, ज्योतिष, राजवंश, कर्मकाण्ड के अलावा श्री कृष्ण चरित्र इत्यादि का बड़ा ही मनोरम, अद्भुत वर्णन विस्तार से किया गया है।

 

 

 

 

 

श्री विष्णु और श्री लक्ष्मी की सर्वव्यापकता के साथ ही बेनु, ध्रुव, प्रह्लाद आदि राजाओं की जीवन सरिता का वर्णन कृषि के साथ ही गोरक्षा आदि कार्यों का संचालन सप्त सागर वर्णन, चौदह विद्याओं, वैवस्तवमनु , इक्ष्वाकु, कश्यप, यदुवंश, पुरुवंश, कुरुवंश का वर्णन कल्पांत ने महाप्रलय की विस्तृत विवेचना की गयी है। भक्ति और ज्ञान की अविरल धारा तो इसमें सर्वत्र ही मुक्त रूप से प्रवाहित हो रही है।

 

 

 

 

Sampurna Vishnu Puran PDF Hindi

 

 

 

 

भगवद्गीता के बारे में –

 

 

 

हमारा कृष्ण भावनामृत आंदोलन मौलिक ऐतिहासिक दृष्टि से प्रमाणिक, सहज तथा दिव्य है, क्योंकि यह भगवद्गीता यथा रूप पर आधारित है। सर्वप्रथम मैंने भगवद्गीता यथा रूप इसी रूप में लिखी थी जिस रूप में यह प्रस्तुत की जा रही है। दुर्भाग्यवश जब पहली बार इसका प्रकाशन हुआ तो मूल पाण्डुलिपि को छोटा कर दिया गया, जिससे अधिकांश श्लोको की व्याख्याए छूट गई थी।

 

 

 

 

मेरी अन्य सारी कृतियों में पहले मूल श्लोक दिए गए है फिर उनका अंग्रेजी में लिप्यंतरण, तब संस्कृत शब्दों का अंग्रेजी में अर्थ फिर अनुवाद और अंत में तात्पर्य रहता है। इससे कृति प्रामाणिक तथा विद्वता पूर्ण बन जाती है और उसका अर्थ स्वतः स्पष्ट हो जाता है। किन्तु जब भगवद्गीता यथा रूप की मांग बढ़ी तब तमाम विद्वानों तथा भक्तो ने मुझसे अनुरोध किया कि मैं इस कृति को इसके मूल रूप में ही प्रस्तुत करू ?

 

 

 

 

अतएव ज्ञान की इस महान कृति को मेरी मूल पाण्डुलिपि का स्वरुप प्रदान करने के लिए वर्तमान प्रयास किया गया है जो पूर्ण परम्परागत व्याख्या से युक्त है कि जिससे कृष्ण भावनामृत आंदोलन की अधिक प्रगतिशील एवं पुष्ट स्थापना की जा सके। यह सम्पूर्ण जगत में विशेषतया नई पीढ़ी के बीच अति लोकप्रिय हो रहा है।

 

 

 

यह ग्रंथ महाकाव्य इतना व्यापक और विस्तृत है कि इसे नई पीढ़ी के साथ ही प्रौढ़ प्रचीन पीढ़ी भी अपने हृदय कमल पर स्थापित कर रही है। प्रौढ़ इसमें इतनी रूचि दिखा रहे है कि हमारे शिष्यों के पिता तथा पितामह हमारे संघ के आजीवन सदस्य बनकर हमारा उत्साह वर्धन कर रहे है।

 

 

 

लांस एंजिलिस में अनेक माताए तथा पिता मेरे पास यह कृतज्ञता व्यक्त करने आते थे कि मैं सारे विश्व में कृष्ण भावनामृत आंदोलन की अगुआई कर रहा हूँ। उनमे से कुछ लोगो ने अपनी बातो को इस तरह से व्यक्त किया कि “हम अमरीकी लोग बड़े ही भाग्यशाली है कि आपने अमरीका में कृष्ण भावनामृत आंदोलन का शुभारंभ किया है।”

 

 

 

 

किन्तु इस आंदोलन के आदि प्रवर्तक तो स्वयं भगवान कृष्ण है, क्योंकि यह आंदोलन बहुत काल पूर्ण ही प्रचलित हो चुका था और परम्परा द्वारा ही मानव समाज में चला आ रहा है। यदि इसका किंचित मात्र श्रेय है तो मुझे नहीं अपितु मेरे गुरु कृष्णकृपा श्री मूर्ति ॐ विष्णुपाद परमहंस परिब्राजकाचार्य 108 श्रीमद्भक्ति सिद्धांत सरस्वती गोस्वामी महाराज प्रभुपाद के कारण है।

 

 

 

 

यदि इसका कुछ भी श्रेय मुझे है तो बस इतना ही कि मैंने बिना किसी मिलावट के भगवद्गीता को यथा रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। मेरे इस प्रस्तुतिकरण के पूर्व भगवद्गीता के जितने भी अंग्रेजी संस्करण निकले है, उनमे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को व्यक्त करने के प्रयास दिखते है।

 

 

 

किन्तु भगवद्गीता यथा रूप प्रस्तुत करते हुए हमारा प्रयास भगवान कृष्ण के संदेश (मिशन) को प्रस्तुत करना रहा है। हमारा कार्य तो कृष्ण की इच्छा को प्रस्तुत करना है, न कि किसी राजनीतिज्ञ दार्शनिक, विज्ञानी की संसारी इच्छा को, क्योंकि इसमें चाहे कितना भी ज्ञान क्यों न हो, कृष्ण विषयक ज्ञान का सर्वथा अभाव रहता है।

 

 

 

 

जब कृष्ण कहते है – मन्मना भव यद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु – तो हम तथा कथित पंडितो की तरह यह नहीं कहते कि कृष्ण तथा उनकी अंतरात्मा पृथक-पृथक है। कृष्ण परब्रह्म है, और कृष्ण के नाम, उनके रूप, उनके गुणों, उनकी लीलाओ आदि में अंतर नहीं है। जो व्यक्ति परम्परागत कृष्ण भक्त नहीं है, उसके लिए कृष्ण के सर्वोच्च ज्ञान को समझना अत्यंत दुष्कर है।

 

 

 

 

सामान्यतया तथा कथित विद्वान, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक तथा स्वामी कृष्ण के सम्यक ज्ञान के बिना भगवद्गीता पर भाष्य लिखते समय कृष्ण को उसमे से निकालने का प्रयास करते है या फिर कृष्ण को मारने का प्रयास करते है लेकिन कथित विद्वान अपनी विद्वता के मदांध में चूर होने के कारण यह समझ ही नहीं पाते कि भगवद्गीता का लेखन श्री कृष्ण का वर्णन किए बिना अपूर्ण हो जाती है। जैसे दुग्ध से ही मक्खन प्राप्त होता है न कि पानी द्वारा, उसी तरह श्री कृष्ण को दर्शाए बिना भगवद्गीता का कोई औचित्य ही नहीं है।

 

 

 

 

भगवद्गीता का ऐसा अप्रमाणिक भाष्य मायावादी भाष्य कहलाता है, और चैतन्य महाप्रभु हमे ऐसे अप्रमाणिक लोगो से सावधान कर गए है। वे कहते है कि जो भी व्यक्ति भगवद्गीता को मायावादी दृष्टि से समझने का प्रयास करता है, वह बहुत बड़ी भूल करेगा। ऐसी भूल का दुष्परिणाम यह होगा कि भगवद्गीता के दिग्भ्रमित जिज्ञासु आध्यात्मिक मार्ग दर्शन के मार्ग में मोह ग्रस्त हो जाएगे और वे भगवद धाम वापस नहीं जा पाएगे।

 

 

 

 

 

 

मित्रों यह Sampurna Vishnu Puran PDF Hindi  कैसी लगी जरूर बताएं और Vishnu Puran gita press pdf की तरह की दूसरी बुक्स के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और Vishnu Puran Hindi Pdf Download शेयर भी जरूर करें।

 

 

 

 

1- Shiv Puran in Hindi PDF / शिव पुराण फ्री में डाउनलोड करें

 

2- { PDF } Atharva Veda in Hindi PDF / अथर्व वेद फ्री में डाउनलोड करें।

 

3- Vishnu Puran book in Marathi pdf free download

 

 

 

 

 

Leave a Comment