Sundar Kand PDF Hindi Download / सुन्दर काण्ड फ्री डाउनलोड

Sundar Kand PDF Hindi मित्रों इस पोस्ट में Sundar Kand PDF के बारे में बताया गया है।  आप यहाँ  से सुन्दर काण्ड फ्री में डाउनलोड Sunderkand Full in Hindi PDF Free Download कर सकते  हैं।

 

 

 

 

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महावीर हनुमान की शक्ति का वर्णन करना किसी भी व्यक्ति या कवि के लिए संभव नहीं है। जिनका वर्णन श्री राम जी ने खुद अपने मुख से किया है।

 

 

 

 

तुलसी दास जी ने महावीर हनुमान का वर्णन अत्यंत प्रभाव पूर्ण श्लोक के द्वारा किया है।

 

 

 

अतुलित बल धामं , हेम शैलाभ देहं। दनुजवन कृशानं ज्ञानिनाम अग्रगण्यम।। 

सकल गुण निधानं , वनराणां धीशम। रघुपति प्रिय भक्तम ,वातजातम नमामि।। 

 

 

 

 

हिन्दू धर्म ग्रंथ में राम चरित मानस का उच्च स्थान है और राम चरित मानस में पांचवा अध्याय है, उसे ही सुंदरकाण्ड के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

 

 

 

 

राम चरित मानस में सभी काण्ड में भगवान श्री राम के गुणों और पुरुषार्थ का वर्णन है। लेकिन एक ऐसा काण्ड है जिसमे महावीर हनुमान के पराक्रम का अवर्णनीय कथ्य है। इस काण्ड में श्री राम भक्त हनुमान की विजय का अतुलनीय वर्णन है।

 

 

 

 

 

 

सुंदरकाण्ड  का पाठ करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और दैहिक, दैविक, भौतिक तापो से मुक्ति भी मिलती है। रावण की लंका त्रिकूट यानी तीन पर्वतों की श्रेणी पर स्थापित थी। जैसा कि रामायण में तुलसीदास से स्वयं लिखा है।

 

 

 

 

 

गिरि त्रिकूट ऊपर बसि  लंका। तंह रावण रह सहज अशंका।। 

 

 

 

 

 

उन तीनो पर्वतों के नाम सुवैल पर्वत, नील पर्वत और सुंदर पर्वत है। सुंदर पर्वत में अशोक उपवन था। वहीं पर रावण ने सीता को रखा हुआ था और वहीं पर हनुमान और सीता की भेंट हुई थी। इसलिए ही इस काण्ड का नाम सुंदरकाण्ड पड़ा है। इस काण्ड में हनुमान जी ने रावण को अच्छी तरह से समझा था।

 

 

 

 

 

 

लेकिन रावण को अपने बल और अपने पुत्रादि का बहुत ही गर्व था। जिसे महावीर हनुमान ने अपने पराक्रम से खंड-खंड कर दिया, हनुमान जी ने रावण की सभा में आने पर भी अपनी वाक क्षमता का अनुपम परिचय दिया था। रावण ने महावीर हनुमान से पूछा –

 

 

 

 

 

तुलसी दास के शब्दों में – कह दशकंठ कवन तै कीसा। केहिके बल घालेसि बन खीसा।। 

 

 

 

 

 

तब पवन सुत हनुमान ने उसे उत्तर दिया, तुलसीदास जी के शब्दों के अनुसार जो इस प्रकार है।

 

 

 

 

सुनु रावण ब्रह्माण्ड निकाया। पाई जासु बल विरचित माया।। 

खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली। बधे सकल अतुलित बलशाली।। 

जाके बल लवलेस ते , जितेहु चराचर झारि।

तासु दूत मैं जाकरि , हरि आनेहु प्रिय नारि।। 

 

 

 

 

 

रामदूत महावीर की बातों से रावण अपनों के बीच बहुत लज्जित हुआ था। इसलिए उसने महावीर की पूछ में अग्नि प्रज्वलित करने की आज्ञा दे दी।

 

 

 

 

 

 

लेकिन यहां भी राम भक्त हनुमान ने रावण का मान मर्दन किया और उसकी पूरी लंका को ही जला डाला जिसका रावण को तनिक भी अनुमान नहीं था। सुंदरकाण्ड ( Sundar Kand Download ) का पाठ प्रत्येक मनुष्य को अवश्य ही करना चाहिए, जिससे तामस, दुर्गुण जैसी लंका को सुंदरकाण्ड रूपी अग्नि से भस्म किया जा सके।

 

 

 

 

 

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